शनिवार 25 जुलाई 2026 - 07:31
हुसैनियत का संदेश दुनिया तक पहुँचाना हमारी ज़िम्मेदारी है।मौलाना सैयद रूहे ज़फ़र रिज़वी

हौज़ा / नमाज़ ए जुमआ के ख़ुत्बे में मौलाना सैयद रूहे ज़फ़र रिज़वी ने तक़वा के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा कि तक़वा अपनाना हर मोमिन की बुनियादी ज़िम्मेदारी है। इंसान को अपनी ज़िंदगी इस तरह गुज़ारनी चाहिए कि वह अल्लाह तआला, हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम अहलेबैत-ए-अतहार अलैहिमुस्सलाम और इमाम-ए-ज़माना स.ल. हज़रत हुज्जत इब्ने अल-हसन अल-अस्करी अज्जलल्लाहु तआला फरजहुश्शरीफ़ की रज़ा और ख़ुशनूदी हासिल कर सके। उन्होंने कहा कि हलाल को अपनाना और हराम से पूरी तरह बचना ही वास्तविक तक़वा की बुनियाद है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मुंबई की खोजा शिया अशना अशरी जामा मस्जिद, पाला गली में 24 जुलाई 2026 को आयोजित जुमआ के ख़ुत्बे में हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मौलाना सैयद रूहे ज़फ़र रिज़वी ने तक़वा की अहमियत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हर मोमिन का कर्तव्य है कि वह अपनी ज़िंदगी इस तरह गुज़ारे जिससे अल्लाह, पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि व सल्लम), अहलेबैत (अ.) और इमाम-ए-ज़माना हज़रत इमाम मेंहदी (अ.ज.) की रज़ामंदी हासिल हो।उन्होंने कहा कि हलाल को अपनाना और हराम से बचना ही सच्चे तक़वा की बुनियाद है।

मौलाना ने सूरह आले इमरान की आयत "ऐ ईमान वालों! अल्लाह से वैसा डर रखो जैसा उससे डरने का हक़ है और मुसलमान होने की हालत के अलावा मौत न आए" का हवाला देते हुए कहा कि क़ियाम-ए-आशूरा और इमाम हुसैन (अ.) की अज़ादारी का एक बड़ा उद्देश्य इंसान में तक़वा पैदा करना और उसे सच्चा मुसलमान बनाना है।

उन्होंने इमाम हुसैन (अ.) के इस ऐतिहासिक कथन "मैं अपने नाना की उम्मत की इस्लाह के लिए निकला हूँ" का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम हुसैन (अ.) ने दीन में आई विकृतियों को दूर करने और हलाल-हराम की वास्तविक पहचान को पुनः स्थापित करने के लिए क़ियाम किया।

मौलाना रिज़वी ने अज़ादारी में इख़्लास की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि सभी धार्मिक कार्य केवल अल्लाह की रज़ा के लिए होने चाहिए। उन्होंने दिखावा प्रदर्शन और प्रसिद्धि की इच्छा से बचने की नसीहत की तथा कहा कि तबर्रुक और अन्य शिआर-ए-हुसैनी को इस तरह पेश किया जाए कि कर्बला की याद ताज़ा हो और उनका सम्मान बना रहे।

उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) के नाम पर प्यासों को पानी पिलाना और भूखों को भोजन कराना अत्यंत पुण्य का कार्य है, लेकिन अज़ादारी का मूल उद्देश्य केवल यही नहीं, बल्कि इमाम हुसैन (अ.) के संदेश को जीवित रखना है।

हिजाब के महत्व पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हज़रत ज़ैनब (स.अ.) और अहलेबैत (अ.) की क़ुर्बानियाँ हमें पवित्रता, शालीनता और हिजाब की रक्षा का संदेश देती हैं। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं से अज़ादारी के दिनों में हिजाब का पूरा ध्यान रखने की अपील की।

उन्होंने कहा कि अज़ादारी के जुलूस अन्य जुलूसों से इसलिए अलग हैं क्योंकि उनका उद्देश्य कर्बला की मज़लूमियत और इमाम हुसैन (अ.) के सार्वभौमिक संदेश को दुनिया तक पहुँचाना है। इसलिए हर उस कार्य से बचना चाहिए जो इस उद्देश्य में बाधा बने।

देश में अपने अधिकारों की माँग कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और हिंसा की निंदा करते हुए उन्होंने कहा कि युवा ही राष्ट्र का भविष्य हैं। सरकार को उनके जायज़ मुद्दों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए तथा राजनीतिक हितों के बजाय राष्ट्रीय हित, मानवीय मूल्यों, एकता और स्थिरता को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने लोगों से एसआईआर (SIR) फ़ॉर्म समय पर भरने, संबंधित बीएलओ (BLO) से संपर्क करने और इस प्रक्रिया को गंभीरता से पूरा करने की अपील की।

अंत में मौलाना सैयद रूहे ज़फ़र रिज़वी ने शलमचेह सीमा पर अरबईन ज़ायरीन पर हुए हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाना मानवता के विरुद्ध गंभीर अपराध है।

उन्होंने कहा कि दुश्मन इमाम हुसैन (अ.स.) की ज़ियारत के जज़्बे को कमज़ोर करना चाहता है, लेकिन इसके बावजूद लाखों ज़ायरीन पूरी आस्था के साथ कर्बला की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि आज के समय में कर्बला की मज़लूमियत, इमाम हुसैन (अ.) के सार्वभौमिक संदेश और हुसैनी विचारधारा को पूरी दुनिया तक प्रभावी ढंग से पहुँचाना हम सबकी ज़िम्मेदारी है।

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